आजा बचपन फिर से आजा
आजा बचपन फिर से आजा -2, जब मेरे पहले पैर कभी तेरी दुनिया में आया था। लल्ली मुन्नी बहना कह कर सबने ही प्यार जाता था। जब मुझको इतना नेह ना था इस पैसे और रुपैया में, मैया से तो मेरी जिद्दी थी बिट्ठलादे ऊँट कुल्हिया में। तब द्वेष भाव का नाम न था मेरे पावन वो पल आजा, आजा बचपन फिर से आजा। जब जलते दीपक की लो मेरी भी लग जाती थी, ...